थानो पर आने वाली जन शिकायतों का निस्तारण न होना दुर्भाग्य पूर्ण बात
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जनपद कुशीनगर में सभी 6 तहसीलों के गांवों में भूमि विवाद मामले में मारपीट खून खराबा रुकने का नाम नही ले रहा है ।
आप सभी जानते है कि पिछले 5 सालों में भूमि विवाद से सम्बंधित मामले में समस्याओ का पुलिंदा मिलने पर लेखपाल और थाने की संयुक्त लापरवाही के चलते हत्या जैसे अपराध आम होती जा रही है प्रायःथानों पर देखा जाने लगा है कि पुलिस भूमि विवाद मामले को इस कदर इग्नोर करती है जैसे पीड़ित की समस्या से पुलिस का कोई सरोकार नहीं है ।
वही जिलाधिकारी अपरजिलाधिकारी से शिकायत करने पर उनका आदेश उन्ही के हाथ पहुंच जाता है लेखपाल और थाने पर तैनात पुलिस के हाथ में आने वाली उच्च अधिकारी का आदेश केवल एक रद्दी का कागज का पुलिंदा बन कर रह जाता है। आखिर पीड़ित जाय तो कहा जाय थाने पर जाने पर पुलिस तो तहसीलों पर राजस्व अधिकारी मामले का हवा हवाई कर देती है वही पीड़ित से पुलिस का कहना आसान हो जाता है कि राजस्व मामले में पुलिस हस्तक्षेप का विषय नही है ऐसे में राजस्व अधिकारी *लेखपाल* के घोर अनिमियता के कारण तहसीलों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है अगर जिले की जनता से इस गम्भीर मारपीट दंगा फसाद पर दोषी कौन होता है लेखपाल या पुलिस?
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ओम पत्रिका उत्तर प्रदेश